उमर खालिद की गिरफ्तारी से भारतीय मुसलमानों की युवा पीढ़ी के लिए गरिमामय और लोकतांत्रिक आवाज उठाने का दरवाजा बंद हो गया है

उमर खालिद की गिरफ्तारी से भारतीय मुसलमानों की युवा पीढ़ी के लिए गरिमामय और लोकतांत्रिक आवाज उठाने का दरवाजा बंद हो गया है

मेरे एक दोस्त हैं हिलाल अहमद. मेरी तरह वे भी दिप्रिंट के स्तंभकार हैं. उन्होंने अपनी मेज पर तीन तस्वीरें सजा रखी हैं. एक तस्वीर काबा-शरीफ की है, आपको ये याद दिलाती हुई कि हिलाल पांचों वक्त के नमाजी हैं. बगल में एक स्केच चे ग्वेरा की है चूंकि हिलाल अहमद का मार्क्सवादी विचार-परंपरा से गहरा जुड़ाव है. और, तीसरी तस्वीर महात्मा […]

India needs SC-ST sub-quota. And the Supreme Court just removed one key roadblock

India needs SC-ST sub-quota. And the Supreme Court just removed one key roadblock

The last thing you expect me to do in these times is to welcome a Supreme Court judgment by Justice Arun Mishra’s bench. But it so happens that among the various questionable and controversial orders passed by Justice Arun Mishra before his retirement, one stood out for its positive potential. This judgment can remove a long-standing roadblock in fine-tuning India’s existing reservation policies. But it is […]

भारत में एससी-एसटी के बीच उपश्रेणियां बनाने की जरूरत, सुप्रीम कोर्ट ने राह की एक बाधा दूर की

भारत में एससी-एसटी के बीच उपश्रेणियां बनाने की जरूरत, सुप्रीम कोर्ट ने राह की एक बाधा दूर की

जिस तरह का वक्त आन पड़ा है उसमें शायद ही किसी को उम्मीद हो कि मुझ जैसा शख्स सुप्रीम कोर्ट के एक ऐसे फैसले का स्वागत करेगा जिसे जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने सुनाया है. वैसे तो जस्टिस मिश्रा ने रिटायरमेंट से पहले बहुत से विवादास्पद फैसले सुनाये, उनके कई फैसलों पर सवालिया निशान लगाये जा सकते हैं लेकिन उनका सुनाया हाल का एक […]

योगेन्द्र यादव का कॉलम:अंग्रेजी के वर्चस्व के खिलाफ हिंदी अकेले नहीं लड़ सकती; कड़वा सच है कि अंग्रेजों के जाने के बाद से देश में अंग्रेजी की गुलामी घटी नहीं, बढ़ी है

योगेन्द्र यादव का कॉलम:अंग्रेजी के वर्चस्व के खिलाफ हिंदी अकेले नहीं लड़ सकती; कड़वा सच है कि अंग्रेजों के जाने के बाद से देश में अंग्रेजी की गुलामी घटी नहीं, बढ़ी है

इस साल हिंदी दिवस (14 सितंबर) पर हिंदी भाषियों, हिंदी प्रेमियों और शुभचिंतकों को पांच संकल्प लेने चाहिए ताकि हमें राजभाषा पखवाड़े के पाखंड से मुक्ति मिले। साथ ही हिंदी दिवस के नाम पर हर साल हिंदी की बरसी न मनानी पड़े। कड़वा सच यह है कि अंग्रेजों के जाने के बाद से देश में अंग्रेजी की गुलामी घटी नहीं, […]

एक ही दिन कफील खान, शर्जील उस्मानी और देवांगना कलीता की रिहाई किसी पैटर्न का हिस्सा नहीं बल्कि एक अपवाद है

एक ही दिन कफील खान, शर्जील उस्मानी और देवांगना कलीता की रिहाई किसी पैटर्न का हिस्सा नहीं बल्कि एक अपवाद है

‘ए हैट्रिक फ्रॉम द कोर्ट’ यानि कोर्ट ने हैट्रिक लगायी. मंगलवार को मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने अपने ट्वीट में यही लिखा था. नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं के लिए मंगलवार का दिन खुशखबरी लेकर आया था, उन्हें इस दिन एक पर एक तीन अच्छी खबरें सुनने को मिलीं और तीस्ता सीतलवाड़ ने अपना ट्वीट इसी बात को […]

अयोध्या का कार्यक्रम विशुद्ध राजनीतिक कर्मकांड है, सेक्युलरिज्म के रक्षक ही इसकी हार के जिम्मेदार

अयोध्या का कार्यक्रम विशुद्ध राजनीतिक कर्मकांड है, सेक्युलरिज्म के रक्षक ही इसकी हार के जिम्मेदार

भविष्य का कोई इतिहासकार 5 अगस्त 2020 की तारीख के आगे ये लिख सकता है कि इस दिन भारत में सेक्युलरिज्म की मौत हुई. बेशक, हमारा ये इतिहासकार यह भी लिखेगा कि मरीज तो हमेशा से ही बीमार चला आ रहा था या उसके लिए ज्यादा ठीक होगा ये लिखना कि मरीज पिछले तीन दशक से बीमार था. इतिहासकार उन […]