स्वराज अभियान महाराष्ट्र के महासचिव, संजीव साने का लेख: सीधा चयन, हानिकारक!

स्वराज अभियान महाराष्ट्र के महासचिव, संजीव साने का लेख: सीधा चयन, हानिकारक!

सीधा चयन, हानिकारक! हाल ही में केंद्र सरकार ने उपसचिव स्तर के अधिकारियों का सीधा चयन करने का निर्णय लिया है. यह क़दम एक सोची समझी नीति के तहत उठाया गया है. केन्द्रीय सेवाओं में अधिकारी स्तर की सरकारी नौकरी प्राप्त करने के लिए अब तक यू.पी.एस.सी की परीक्षा पास करना जरूरी था. देशभर में लाखो नौजवान ग्रेजुएशन के बाद […]

स्वराज अभियान महाराष्ट्र के महासचिव, संजीव साने का लेख: साफ नीयत कहाँ ?  सही विकास कहाँ?

स्वराज अभियान महाराष्ट्र के महासचिव, संजीव साने का लेख: साफ नीयत कहाँ ? सही विकास कहाँ?

साफ नीयत कहाँ? सही विकास कहाँ? भाजपा सरकार के चार साल पूरे हुए. इस अवसर पर उन्होंने अपना पुराना नारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ छोड दिया, और नए नारे के साथ सामने आए हैं. नया नारा है “साफ नीयत , सही विकास”. इससे यह स्पष्ट हो गया कि सबका साथ मिले बिना सबका विकास नहीं हो सकता. विगत चार सालों […]

स्वराज अभियान महाराष्ट्र के महासचिव, संजीव साने का लेख: क्या हम हिन्दुओं के हित में काम नही करतें?

स्वराज अभियान महाराष्ट्र के महासचिव, संजीव साने का लेख: क्या हम हिन्दुओं के हित में काम नही करतें?

क्या हम हिन्दुओं के हित में काम नही करतें? देश में विभिन्न विचारों के साथ काम करने वाले अनेक समूह हैं। ज़ाहिर है कि अपने व्यक्तिगत हित से आगे निकलकर बड़े समूह के लिए काम करने का सीधा संबंध विचार से होता है। कोई भी कार्य बिना विचार के नहीं होता, इसलिए उसे स्पष्ट तरीके से लोगों को बताना जरूरी […]

स्वराज अभियान महाराष्ट्र के महासचिव, संजीव साने का लेख: संवेदना

स्वराज अभियान महाराष्ट्र के महासचिव, संजीव साने का लेख: संवेदना

संवेदना तब एक तौलिये से पूरा घर नहाता था दूध का नम्बर बारी-बारी आता था छोटा माँ के पास सो कर इठलाता था पिताजी से मार का डर सबको सताता था बुआ के आने से माहौल शान्त हो जाता था पूड़ी-खीर से पूरा घर त्यौहार मनाता था बड़े भाई के कपड़े छोटे होने का इन्तजार रहता था स्कूल मे बड़े […]

स्वराज अभियान महाराष्ट्र के महासचिव, संजीव साने का लेख: गैर भाजपा वाद कितना सही, कितना जरूरी?

स्वराज अभियान महाराष्ट्र के महासचिव, संजीव साने का लेख: गैर भाजपा वाद कितना सही, कितना जरूरी?

गैर भाजपा वाद कितना सही, कितना जरूरी? 2019 के चुनावी गठजोड़ की शुरुआत कर्नाटक से हो गई है. भाजपा विरोधी शक्तियाँ अपने अंकगणित के हिसाब से देश की मौजूदा जनविरोधी और संविधान विरोधी सरकार को उखाड़ फेंकने की मंशा रखती हैं, जो कि स्वाभाविक भी है. इसी अंकगणित को सामने रखकर डॉ. राम मनोहर लोहिया ने वर्ष 1961 से गैर […]