स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव का लेख: मुद्दा क्यों नहीं नशामुक्ति का सवाल?

स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव का लेख: मुद्दा क्यों नहीं नशामुक्ति का सवाल?

अगर औरतों को इस देश में एक दिन के लिए राजपाट मिल जाये, तो वे क्या फैसला करेंगी? आप जब, जहां चाहे औरतों के समूह से यह सवाल पूछ लें, आपको एक ही जवाब मिलेगा. लेकिन, हमारे लोकतंत्र में यह मुद्दा राष्ट्रीय चुनाव का मुद्दा क्यों नहीं बनता? तीन अलग-अलग मौकों पर यह सवाल मेरे सामने मुंह बाये खड़ा हुआ […]

স্বরাজ ইন্ডিয়া রাষ্ট্রীয় অধ্যক্ষ যোগেন্দ্র যাদবের প্রতিবেদন: কর্ণাটক দেখে মোদির পতন বা রাহুলের উত্থান ভাবা ভুল

স্বরাজ ইন্ডিয়া রাষ্ট্রীয় অধ্যক্ষ যোগেন্দ্র যাদবের প্রতিবেদন: কর্ণাটক দেখে মোদির পতন বা রাহুলের উত্থান ভাবা ভুল

কর্ণাটক দেখে মোদির পতন বা রাহুলের উত্থান ভাবা ভুল কর্ণাটকের মুখ্যমন্ত্রী পদে কুমারাস্বামীর শপথগ্রহণ অনুষ্ঠানে অংশ নিয়ে বিভিন্ন অ-বিজেপি দলের নেতা-নেত্রীরা একজোট হওয়ার বার্তা দিয়েছেন। তবে এই বিরোধী ঐক্য নিয়ে আমি খুব একটা আশাবাদী হতে পারছি না। নরেন্দ্র মোদির চার বছরের শাসনে ভারতীয় প্রজাতন্ত্রের মূল্যবোধগুলি ভয়ঙ্কর আঘাত পেয়েছে। কিন্তু বিরোধীদের তরফে জোটবদ্ধ হওযার যেসব চেষ্টা নজরে এসেছে সেগুলি আমাকে হতাশ […]

स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य नीरज कुमार का लेख: किसके-किसके अच्छे दिन आ गएँ? ज़रा हाथ उठा कर बताइये तो!

स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य नीरज कुमार का लेख: किसके-किसके अच्छे दिन आ गएँ? ज़रा हाथ उठा कर बताइये तो!

किसके-किसके अच्छे दिन आ गएँ? ज़रा हाथ उठा कर बताइये तो! भारत के प्रधानमंत्री माननीय मोदी जी अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। जब मोदी जी प्रधानमंत्री बनने वाले थे तब उन्होंने कई वायदे किये थे जिसमे सबसे प्रमुख “अच्छे दिन” लाने का वादा था। अब जबकि मोदी जी के कार्यकाल को 5 वर्ष पूरे होने […]

स्वराज इंडिया हरियाणा के वरिष्ठ नेता रवि भटनागर का लेख: किसान की दुर्दशा, ज़िम्मेदार कौन ?

स्वराज इंडिया हरियाणा के वरिष्ठ नेता रवि भटनागर का लेख: किसान की दुर्दशा, ज़िम्मेदार कौन ?

किसान की दुर्दशा, ज़िम्मेदार कौन ? सोना तो उगलती रही इस देश की धरती, पर जाता कहाँ रहा? सब जानते हैं, किस किस ने निगला इस सोने को। कवि और लेखकों की अद्भुत कल्पनायें, किसान को अन्नदाता के रूप में संबोधित कर उनका मान बढ़ाती रहीं। हमारे सिनेमा और सभी बडे़ राजनीतिक दलों के नेता हर मौके पर और हर […]