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स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य नीरज कुमार का लेख: किसके-किसके अच्छे दिन आ गएँ? ज़रा हाथ उठा कर बताइये तो!

स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य नीरज कुमार का लेख: किसके-किसके अच्छे दिन आ गएँ? ज़रा हाथ उठा कर बताइये तो!

किसके-किसके अच्छे दिन आ गएँ? ज़रा हाथ उठा कर बताइये तो!

भारत के प्रधानमंत्री माननीय मोदी जी अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। जब मोदी जी प्रधानमंत्री बनने वाले थे तब उन्होंने कई वायदे किये थे जिसमे सबसे प्रमुख “अच्छे दिन” लाने का वादा था। अब जबकि मोदी जी के कार्यकाल को 5 वर्ष पूरे होने में ज्यादा वक़्त नहीं बचा है तो बताइये आप लोगों में से किन-किन के अच्छे दिन आ गए हैं?
मोदी जी के “अच्छे दिन” के पड़ताल से पहले आइये याद करें उन सुनहरे सपनों को जिसे मोदी जी ने हमे दिखाया था, नीचे दिए हैं कुछ हसीन सपने जो मोदी जी ने हमे दिखाये थे:

बहुत हुई देश में महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार – जरा दिमाग पर जोर डालिये और बताइये की किन-किन चीज़ों के दाम कम हो गए? कितनी महंगाई कम हुई है? दूध, फल , सब्जी, दाल, पेट्रोल, डीजल, रेल किराया इत्यादि में से कौन सी चीज़ सस्ती हुई है? क्या ख़त्म हो गयी है देश में महंगाई की मार?

बहुत हुआ नारी पर वार, अबकी बार मोदी सरकार – देश के हर कोने में और उसमे भी ज्यादातर भाजपा साशित प्रदेशों में आये-दिन महिलाओं के बलात्कार की खबरें आती रहती हैं। 3 साल की बच्ची से लेकर बुजुर्ग महिला के साथ दुष्कर्म की ख़बरों ने देश को झकझोर कर रख दिया है। हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में महिलाओं के प्रति अत्याचार का बुरा हाल है, फिर कहाँ ख़त्म हुआ नारी पर वार?

बहुत हुआ किसान पर अत्याचार, अबकी बार मोदी सरकार – यह भारत की विडम्बना है कि एक कृषि प्रधान देश होते हुए भी यहां के किसानों को आत्म-हत्या करनी पड़ती है। देश में शायद ही ऐसी कोई मंडी हो जहाँ किसानों को उनका न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलता हो। दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक किसानों ने आंदोलन किये पर आज भी उनकी हालत दयनीय है। कई जगह सरकारों ने फसल बीमा के नाम पर भद्दा मजाक किया, बीमा के नाम पर उन्हें 50 पैसे तक थमाए गए। बीमा योजनाओं से किसानों को तो कुछ नहीं मिला पर बीमा कंपनियों ने करोड़ों का मुनाफा कमा लिया। क्या सच में ख़त्म हो गया किसानों पर अत्याचार?

बहुत हुआ भ्रष्टाचार, अबकी बार मोदी सरकार – बड़े घोटालों की बात छोड़ दीजिये, आप अपने जीवन की रोज़ मर्रा की चीज़ों में देखिये और सोचिये की क्या ख़त्म हो गया भ्रष्टाचार? क्या अब आपके यहां के पुलिस वाले रिश्वत नहीं लेते? क्या अब आपके सारे काम बिना रिश्वत के हो जाते हैं? बड़े-बड़े घोटालों में मोदी जी की सरकार सबुत नहीं जुटा पाई और 2G जैसे घोटालों में कोर्ट ने किसी को दोषी नहीं पाया। विजय माल्या साहब देश को चूना लगा कर मोदी जी के नाक के निचे से निकल गए, नीरव मोदी जी भी दावोस में मोदी जी के साथ फोटो खिंचवाकर देश को चूना लगा गए, मोदी जी के मेहुल भाई भी निकल लिए पतली गली से। नोटबंदी के वक़्त आप सब ने देखा होगा कैसे सारे बड़े साहब लोगों ने कितने आराम से अपने पैसों को ठिकाने लगा दिया। कहाँ ख़त्म हुआ है भ्रष्टाचार?

बहुत हुआ रोज़गार का इंतेजार, अबकी बार मोदी सरकार – मोदी जी ने 2 करोड़ रोजगार देने की बात कही थी और जब हिसाब देने की बात आयी तो उन्होंने ये कह दिया की पकोड़ा बेचना भी रोज़गार है, अब आप पूरे देश में कितने पकोड़े बेचने वाले हैं गिनते रहिये और जोड़ लीजिये की 2 करोड़ रोज़गार मिले या नहीं। देश में करोड़ों की संख्या में युवा इंजीनियरिंग, एमबीए, डिप्लोमा इत्यादि कर के बेरोज़गार पड़े हैं। लाखों युवा मोदी जी के स्किल इंडिया के तहत प्रशिक्षण पाकर भी बेरोजगार बैठे हैं। अब बताइये जरा कि क्या सच में रोज़गार का इंतेजार ख़त्म हो गया है?

बहुत हुई जनता पर पेट्रोल-डीजल की मार, अबकी बार मोदी सरकार – आज पेट्रोल और डीजल की कीमत अब तक के सबसे अधिकतम स्तर पर है। मोदी जी ने यह नारा मनमोहन सिंह की सरकार को घेरते हुए दिया था, यहां आप सबको बता दें की मनमोहन सिंह की सरकार के समय जो तेल की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में थी उस से काफी कम कीमत मोदी जी की सरकार में है फिर भी ना जाने क्यों मोदी जी की सरकार में मनमोहन सिंह की सरकार से कहीं ज्यादा महँगी पेट्रोल और डीजल की कीमतें हैं।भूटान जैसे देश जो 100% अपना तेल भारत से खरीदते हैं वो भी हमसे लगभग आधे दाम पर पेट्रोल-डीजल बेच रहे हैं। ये कैसे करते हैं मोदी जी कि जो हमसे माल ख़रीदे वो अपने लोगों को हमसे सस्ता बेचे और हम अपने ही देश के लोगों को महंगा बेचें? अब बताइये की जनता पर मोदी जी ने पेट्रोल-डीजल की मार को कितना कम कर दिया है?

अच्छे दिन आने वाले हैं, अबकी बार मोदी सरकार

अब आपलोग सच-सच बताइये की किसके-किसके अच्छे दिन आ गए?

किसानों के?
ना मिल रहा किसानों को सही दाम, ना मिलती बीमा की रकम। कर्ज में डूबा किसान आत्म हत्या को है मजबूर। डीजल की बढ़ी कीमतों से उत्पादन और ढुलाई का खर्च बढ़ा। एक तरफ देश के किसानों को दाल के सही दाम नहीं मिल रहे, वहीं दूसरी तरफ हम विदेशों से दाल आयात कर रहे हैं। एक बार देश के कुछ हिस्सों में कुछ किसानों से मिल कर आइये और उनसे पूछिए की क्या उनके “अच्छे दिन” आ गए?

युवाओं के?
एक तरफ तो हमारे देश के युवाओं के पास रोज़गार नहीं ऊपर से मोदी जी आपके पार्टी के नेता उलटे-सीधे बयान देते रहते हैं, कहते हैं कि क्यों पड़े हो नौकरी के चक्कर में, पकोड़े का ठेला लगा लो या पान की दुकान खोल लो। पर इसमें आपके नेताओं को दोष क्या दिया जाये जब आप खुद ही पकोड़ा बेचने को रोज़गार कह रहे हैं। जब पकोड़े बेचने वाले से पूछते हैं तो वो कहते हैं की रोजगार नहीं इसीलिए पकोड़ा बेच रहे हैं। क्या देश के युवाओं से पकोड़े और पान बिकवाकर हिंदुस्तान को दुनिया का सबसे शक्तिशाली और उन्नत देश बनाएंगे? एक बार देश के युवाओं से उनके मन की बात पूछिए कि क्या उनके “अच्छे दिन” आ गए?

महिलाओं के?
घर बनाने वाली गृहणी हो या दफ्तर में काम करने वाली महिला या फिर नवजात बच्ची, आज कोई भी महफूज नहीं है। गृहणी अपने रसोई में महंगाई से परेशान है तो अपने घर के बाहरअपनी ईज्जत और आबरू की रक्षा के लिए उन्हें सोचना पड़ता है वहीं दूसरी तरफ आपके पार्टी के नेता बयान देते हैं कि “एक-दो रेप की घटनाएं होती रहती हैं, इसमें इतनी कोई बड़ी बात नहीं है”, आपके पार्टी के मुख्यमंत्री कहते हैं कि “लड़कियों को जीन्स नहीं पहनना” चाहिए। हालत ये हो गई है कि लोग बेटियों को पढ़ाने के बारे में सोचने से ज्यादा उन्हें बचाएँ कैसे ये सोच रहे हैं। एक बार महिलाओं की भी ‘मन की बात’ सुनिए और पूछिए उनसे कि क्या महिलाओं के “अच्छे दिन” आ गए?

सीमा पर जवानों के?
मोदी जी प्रधानमंत्री बनने से पहले पाकिस्तान को 56 इंच का सीना दिखा रहे थें। उन्होंने ये यकीन दिलाया कि अब पाकिस्तानी सेना और आतंकियों के हाथों हमारे जवान नहीं मारे जाएंगे। अब किसी माँ की कोख, किसी के मांग का सिंदूर आतंकियों के हाथों नहीं उजाड़ा जाएगा पर क्या ऐसा हुआ? आये दिन सीमा पर जवानों की शहादत की खबरें आते रहती हैं। सेना के जवानों ने ढंग का खाना ना मिलने तक की शिकायत की है और पूर्व सैनिकों को जंतर मंतर पर धरना देना पड़ा है। एक बार देश के जवानों से भी पूछिए की क्या, आ गए उनके “अच्छे दिन”?

खेतों में किसान मर रहे हैं, सीमा पर जवान मर रहे हैं, महिलाओं का सम्मान मर रहा है और युवाओं का अभिमान मर रहा है। आखिर “अच्छे दिन” आएँ किनके मोदी जी?

Photo Credit: Open Source


लेखक: नीरज कुमार
स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य

neeraj7742@gmail.com

लेखक के विचार निजी हैं.