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उत्तर प्रदेश में सरकार द्वारा गोरखपुर  स्थित पंडित रामप्रसाद बिस्मिल जी के स्मृतियों से संबंधित “बिस्मिल भवन” का तोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण

उत्तर प्रदेश में सरकार द्वारा गोरखपुर स्थित पंडित रामप्रसाद बिस्मिल जी के स्मृतियों से संबंधित “बिस्मिल भवन” का तोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण

प्रेस नोट, स्वराज इंडिया
7 नवंबर 2019

उत्तर प्रदेश में सरकार द्वारा गोरखपुर  स्थित पंडित रामप्रसाद बिस्मिल जी के स्मृतियों से संबंधित “बिस्मिल भवन” का तोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण

न्यायालय के आदेश के विरुद्ध मान्यता प्राप्त पत्रकार एवं समाज सेवी  श्यामनन्द जी को ज़ोर जबरदस्ती से निकालने के बाद भवन को तोड़कर गिरा दिया।

स्वराज इंडिया सरकार कि इस कार्यवाही की कड़ी निंदा करता है और मांग करता है की बिस्मिल भवन का पुनः जीर्णोद्धार कर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी स्मृतियों को  बचाया जाए।

विदित हो कि गोरखपुर में स्थित “बिस्मिल भवन” का एक ऐतिहासिक महत्त्व रहा है। 1922 के चौरी-चौरा काण्ड के बाद गोरखपुर में सिविल लाईंस का एरिया कण्टोमेण्ट घोषित कर दिया गया था। जिसके बाद यह अति सुरक्षित क्षेत्र हो गया था। ब्रिटिश तकनीक से निर्मित बिस्मिल भवन उस जमाने की मजबूत बिल्डिंग में से एक था।

1966 में इस भवन का मालिकाना हक नाहिद अली का था, जिन्होंने श्यामानन्द जी को इस भवन में रहने व भवन में बिस्मिल अखबार का प्रकाशन करने की अनुमति दी थी। इस बीच उक्त मकान मान्यता प्राप्त पत्रकार श्यामानन्द को एलाट हो गया।एलाटमेण्ट पर जिला प्रशासन को आपत्ति हुई, जिसके बाद वह जोर- जबरदस्ती पर भी उतर आया।

सन 1970 में जिला न्यायालय ने इस भवन पर सुनवाई हुई जिसमें और मजिस्ट्रेट ने प्रशासन को आदेशित करते हुए श्यामानन्द जी को इस बिल्डिंग से कानूनी प्रक्रिया के जरिये ही निकाले जाने का आदेश देते हुए कोई जोर-जबरदस्ती न करने की हिदायत दी। अपने प्रवास के समय श्यामानन्द जी ने इस घर का नाम ‘बिस्मिल भवन’ रखा। तबसे पत्राचार में बिस्मिल भवन लिखा जाने लगा । बिस्मिल जी से जुड़े तमाम स्मृति चिन्ह शास्त्री जी ने  बिस्मिल भवन को सुरक्षित मान कर संरक्षित रखा करते थे।

83 वर्षीय बिस्मिल उपासक श्यामानन्द से खीझ कर प्रशासन ने भवन जर्जर बताकर ढहा दिया। बिस्मिल अस्थिभस्म, अनेको क्रांतिकारीयो के पत्र, बिस्मिल जी से जुड़ी मेज और बहुत सारी जानकारियों से भरी कागजो की आलमारी प्रशासन ने बेतरतीब फेंक दी या गायब कर दी।10 हजार दुर्लभ किताबें संरक्षित कर लगभग 80 बच्चों को प्रति वर्ष निःशुल्क अध्ययन सुविधा उपलब्ध करानेवाले श्यामानन्द जी आज अपने जरावस्था को प्राप्त हो चुके भवन के साथ प्रशासन से लड़ रहें है।

स्वराज इंडिया ये मांग करता है कि इस बिस्मिल भवन जैसी ऐतिहासिक इमारतें जो स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को समेटे हुए है, सरकार की ये जिम्मेदारी बनती है कि ऐसी इमारतों की पहचान कर पुनः स्थापित करें ताकि आने वाली पीढ़ियों के मन में, स्वतंत्रता संग्राम से जुडी हुई स्मृतियां और आदर्शों का मापदंड बना रहे।

दुनिया के सभी सभ्य देशों में कितने सारे उदहारण है जहां सरकारों ने अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ी इमारतों, विरासतों और चिह्न का पुनः निर्माण किया है और उन्हें बचाया है।

स्वराज इंडिया सरकार कि इस कार्यवाही की कड़ी निंदा करता है और मांग करता है की बिस्मिल भवन का जीर्णोद्धार कर और खोई वस्तुओं को ला उसे पुनः विकसित करे।

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