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UPA II के दौर में शुरू हुई जॉबलेस ग्रोथ का संकट मोदी सरकार के दौर में और गहरा हुआ है, जिसने युवाओं को आंदोलित होने को मज़बूर किया है


Press Release

प्रेस नोट

28.12.2018

– UPA II के दौर में शुरू हुई जॉबलेस ग्रोथ का संकट मोदी सरकार के दौर में और गहरा हुआ है, जिसने युवाओं को आंदोलित होने को मज़बूर किया है 

– यूथ फ़ॉर स्वराज युवाओं के अधिकारों के लिए संघर्षरत है और संगठनों और विचारधाराओं की सीमा से ऊपर उठकर जाकर इस दिशा में हो रहे हर सकारात्मक पहल के साथ खड़ा है।

UPA II के दौर में शुरू हुआ जॉबलेस ग्रोथ अब और विकराल रूप ले चुका है। बेरोज़गारी दर दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, कम वेतन वाले पदों पर भी लाखों की संख्या में डिग्रीधारक विद्यार्थी आवेदन भर रहें हैं। सरकार की बेरुख़ी का आलम यह है कि वो बेरोज़गारी का इतना बड़ा संकट है, यह मनाने तक को तैयार नहीं है, उसका पूरा ध्यान आँकड़ों से खिलवाड़ करने और सच्चाई को देश के सामने आने से रोकने में लगा है। और सरकारी नौकरियों की नियुक्तियों में हो रहे भ्रष्टाचार का आलम तो यह है कि युवाओं का भरोसा ही इस व्यवस्था से उठ रहा है।

ऐसे में युवाओं का आक्रोशित होना लाज़मी है। मार्च में एसएससी घोटाले के खिलाफ़ शुरू हुआ युवा हल्लाबोल आंदोलन इसी आक्रोश की अभिव्यक्ति है। मोर जॉब्स, सिक्योर जॉब्स, फेयर सिलेक्शन के नारे के साथ चलने वाले ऐतिहासिक युवा हल्लाबोल आंदोलन ने देश के कई अन्य संगठनों को इस सवाल पर आवाज़ उठाने को प्रेरित किया है।

यूथ फॉर स्वराज के राष्ट्रिय अध्यक्ष मनीष कुमार ने कहा कि पिछले 5 सालों में एफटीआईआई, हैदराबाद यूनिवर्सिटी, जादवपुर यूनिवर्सिटी, एएमयू, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, बीएचयू, लखनऊ यूनिवर्सिटी, मगध यूनिवर्सिटी, पंजाब यूनिवर्सिटी से लेकर जेएनयू तक देशभर के विश्वविद्यालयों में छात्र आक्रोशित और आंदोलित है। बदहाल शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की बजाए मोदी सरकार छात्रों की आवाज़ दबाने की कोशिशें करती रही हैं, साथ ही विश्वविद्यालय प्रशाषन में औसत दर्ज़े के लोगों को नियुक्त किया जा रहा है। बेरोज़गारी चरम पर है और युवा सड़क पर हैं, लेकिन 24 लाख से ज़्यादा सरकारी पद खाली पड़े हुए हैं। मुद्दे पर काम करने की बजाए सरकार बेरोज़गारी के आंकड़ों को छिपाकर देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए आज देश में बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ चल रहा युवा-हल्लाबोल आंदोलन बड़ा रूप ले रहा है।

चुनाव नज़दीक हैं और लोगों को हिन्दू मुसलमान के नाम पर बांटकर राजनीति करने की लगातार कोशिश हो रही है। ऐसे में स्वराज इंडिया ने नारा दिया है कि इस बार न हिन्दू न मुसलमान, सिर्फ़ किसान नौजवान। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए देशव्यापी किसान आंदोलन के बाद अब हम युवा-हल्लाबोल के माध्यम से बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ नौजवानों को एकजुट कर रहे हैं। यंग इंडिया अधिकार मार्च का समर्थन करते हुए यूथ फॉर स्वराज ऐसे सभी कोशिशों के साथ मजबूती से खड़ा है जो शिक्षा रोज़गार के वाजिब मुद्दों को उठाए।

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