Press Release
दिल्ली के मंगोलपुरी मे बढ़ते शराब और अवैध नशे की समस्या पर स्वराज इंडिया ने की जन जनसुनवाई।

दिल्ली के मंगोलपुरी मे बढ़ते शराब और अवैध नशे की समस्या पर स्वराज इंडिया ने की जन जनसुनवाई।

प्रेस विज्ञप्ति, 17 नवम्बर, 2019 
स्वराज इंडिया, दिल्ली
दिल्ली के मंगोलपुरी मे बढ़ते शराब और अवैध नशे की समस्या पर स्वराज इंडिया ने की जन जनसुनवाई।
– केजरीवाल सरकार ने मुख्यमंत्री की तस्वीर वाली अपनी नशामुक्ति विज्ञापनों पर किया करोड़ों का खर्च, जबकि पिछले पांच सालों मे दिल्ली मे शराब की खपत दुगनी हुई. एक साल मे असली नशामुक्ति कार्य पर हुआ खर्च मात्र 1.79 लाख रुपए: योगेंद्र यादव (राष्ट्रीय अध्यक्ष, स्वराज इंडिया)
– स्थानीय नेताओं व प्रशासन के सहयोग से मंगोलपुरी बना अवैध शराब व ड्रग्स का अड्डा, महिलाएं व बच्चे सुरक्षित नहीं।
– स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री योगेंद्र यादव के साथ स्वराज इंडिया दिल्ली चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर अजित झा भी जनसुनवाई मे हुए शामिल।
स्वराज इंडिया ने “शराब नहीं स्वराज चाहिए मुहिम” के तहत वीरेंद्र राय के नेतृत्व मे नशामुक्त मंगोलपुरी अभियान की शुरूआत। स्वराज इंडिया ने आगामी विधानसभा चुनावों मे दिल्ली की असली और ज़रूरी मुद्दे उठाने वाले उसके सामाजिक प्रयास के तहत “शराब नहीं स्वराज चाहिए” मुहिम की नींव डाली मंगोलपुरी मे। सारी दिल्ली मे महामारी की तरह फैल रही शराब और नशाखोरी अब बेहद घातक और विनाशकारी हो चली है। कहीं कहीं तो रिपोर्ट है कि इस बड़े मुनाफ़े वाले धंधे मे शामिल तत्वों के आपसी झगड़ों मे कई लोग अपनी जान भी गँवा चुके हैं। पिछले पांच सालों मे सरकारी शराब के ठेकों की संख्या के तेज़ी से बढ़ने, और साथ ही अवैध शराब की दुकानों मे बिक्री और ज़्यादा होने के कारण, आम लोगों का, विशेषकर महिलाओं का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है।
स्वराज इंडिया की इस खास मुहिम के तहत शराब और नशे की समस्या से जूझती हुई मंगोलपुरी इलाके मे कई सालों से कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ता श्री वीरेंद्र राय के नेतृत्व मे “नशामुक्त मंगोलपुरी अभियान” की शुरूआत हुई. इसका मुख्य कार्यक्रम रहा स्थानीय लोगों की भागीदारी के साथ इस विषम समस्या पर हुई बहिरंग जनसुनवाई।
इस कार्यक्रम मे यह बात खुलकर सामने आई कि नशामुक्त दिल्ली का वादा करने वाली आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली मे शराब के ठेके खूब बढ़ाए, कई घरेलू और आम मार्किट वाले इलाकों मे और शॉपिंग मॉल मे भी नयी शराब वितरण की लाइसेंसें बेचीं, और इस वजह से पिछले पांच सालों मे दिल्ली मे शराब की खपत दुगनी से भी ज़्यादा हो गई। लोगों ने यह भी कहा कि स्थानीय नेताओं व प्रशासन के सहयोग से मंगोलपुरी अब अवैध शराब व ड्रग्स का बहुत बड़ा एक अड्डा बन चुकी है। इलाके की महिलाएं और बच्चे बिल्कुल सुरक्षित नहीं हैं, और आए दिन कोई न कोई इसी समस्या से जुड़ी वारदात होती रहती है – छेड़खानी, चेन स्नैचिंग, बेवजह मारपीट, चोरी-चकारी, इत्यादि।
इस लाइसेंस बेच मुनाफाखोरी के साथ ही साथ, जले पर नमक छिड़कने जैसे, केजरीवाल सरकार ने मुख्यमंत्री की तस्वीर वाली अपनी नशामुक्ति विज्ञापनों को पिछले पांच सालों मे कई बार लगातार बस स्टैंड, होर्डिंग और पोस्टरों पर लगाया, और टीवी रेडियो और अखबारों मे खूब इश्तेहार दिये। इन विज्ञापनों पर करोड़ों का खर्च किया दिल्ली सरकार  ने, पर अपने ही प्रकाशित आंकड़ों के हिसाब से पिछले एक साल मे असली नशामुक्ति कार्य पर उसका किया खर्च मात्र 1.79 लाख रुपए था।
स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री योगेंद्र यादव और स्वराज इंडिया दिल्ली चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर अजित झा ने इस जनसुनवाई मे आम लोगों की समस्याएं और शिकायतें सुनी और इस समस्या का कारगर और शाश्वत समाधान निकालने का मंगोलपुरी की जनता को अश्वासन दिया। इसके अलावा बड़ी संख्या मे महिलाओं सहित दिल्ली के कई और क्षेत्रों से आए हुए पीड़ित लोगों ने भी जनसुनवाई मे भाग लिया।
स्वराज इंडिया के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष कर्नल जयवीर ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के युवाओं को शराब के जद में डाला है, जहाँ शराब की दुकानों को कम करना था इन्होंने उसकी संख्या को बढ़ा दिया।
स्वराज इंडिया दिल्ली प्रदेश सचिव नवनीत तिवारी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम नशे के बढ़ते व्यापार के खिलाफ लगातार संघर्ष करते आएं है और आज फिर से संकल्प लेते हैं कि सत्ता के नशे में चूर केजरीवाल सरकार को मनमानी नहीं करने देंगे।
नशामुक्ति के खिलाफ दिल्ली सरकार से योगेंद्र यादव के पांच सवाल :
   ● दिल्ली सरकार ने पिछले 5 साल में नई आबकारी नीति क्यों नहीं बनाई?  
  ● पुरानी आबकारी नीति में भी सरकार को शराब का लाइसेंस देने से पहले जनता से पूछने का जो प्रावधान था उसका इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया?
 ● शराब की दुकानों की संख्या घटाने की बजाए बढ़ई क्यों गई? 2014-15 में यह संख्या 768 थी जो 2018-19 में बढ़कर 863 हो गई.
 ● दिल्ली को नशामुक्ति करने की बजाय राज्य में शराब की खपत क्यों बढ़ी? 2014-15 में कुल मिलाकर बक्से शराब बिकी थी जो पहले दो साल में 2016-17 में 2 करोड़ 85 लाख बक्से हो गई।
  ● कहीं इस सब के पीछे राजस्व और दो नंबर की कमाई का लालच तो नहीं है? शराब के टैक्स से को 2014-15 में 3422 करोड़ रुपए की आमदनी हुई जो 2018-19 में बढ़कर 5026 करोड़ हो गई। इसे 2019 में 6000 करोड़ करने का लक्ष्य है।

 


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