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बुनियादी मुद्दों पर चुनाव करवाने के लिए शुरू हुआ “देश मेरा, वोट मेरा, मुद्दा मेरा” अभियान


Press Release

 

प्रेस नोट

23 मार्च 2019

• बुनियादी मुद्दों पर चुनाव करवाने के लिए शुरू हुआ “देश मेरा, वोट मेरा, मुद्दा मेरा” अभियान

• कई नागरिक समूह और जनांदोलनों के सामूहिक प्रयास से देशभर में हुए सैकड़ों कार्यक्रम

• लोकसभा चुनावों में बेरोज़गारी, कृषि संकट, अर्थव्यवस्था, संस्थानों की बदहाली और वंचित समाज के मुद्दों को अभियान के जरिए चुनावी बहस में लाया जाएगा

• समाज को बांटने और भटकाने की कोशिशों के ख़िलाफ़ ट्विटर पर चला #MainBhiKhabardar

बुनियादी मुद्दों पर चुनाव करवाने के उद्देश्य से 23 मार्च को देशभर में “देश मेरा, वोट मेरा, मुद्दा मेरा” अभियान के तहत सैकड़ों कार्यक्रम हुए। समाज को बांटने और असल मुद्दों से भटकाने की कोशिशों के ख़िलाफ़ कई नागरिक समूह और जनांदोलनों का यह सामूहिक प्रयास है। भगत सिंह की शहादत दिवस पर शुरू हुए इस अभियान के माध्यम से लोकसभा चुनावों में बेरोज़गारी, कृषि संकट, वंचित समाज के मुद्दे, अर्थव्यवस्था, संस्थानों की बदहाली जैसे सवालों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाया जाएगा।

राजधानी दिल्ली में अभियान की शुरुआत आईटीओ स्थित शहिदी पार्क से हुई। कार्यक्रम में नागरिकों ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की प्रतिमा के आगे तिरंगे का स्वरूप बनाया और प्रण लिया कि इन चुनावों में असल मुद्दों पर हर राजनीतिक पार्टियों की जवाबदेही तय करेंगे।

निखिल डे ने यह आशा जताई कि यह अभियान इस चुनाव के मूलभूत व असल मुद्दों पर वापिस लौटने की शुरुआत है।

कौन सी पार्टी चुनाव जीतती है, इससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण ये है कि चुनाव जनता के असल मुद्दों पर लड़ा जाए। दुर्भाग्यवश पिछले एक महीने में बेरोज़गारी, कृषि बदहाली, पर्यावरण, भ्रष्टाचार, सामाजिक सौहार्द और संस्थानों पर आक्रमण के सवालों को पीछे कर दिया गया है। हमारे लोकसभा चुनाव का मुद्दा पाकिस्तान में बैठे आतंकियों द्वारा तय हो रहा है और बाकी सभी मुद्दों को राष्ट्रीय सुरक्षा की चादर में छिपाने की घटिया कोशिश हो रही है। पाँच साल में एक बार होने वाले इन अहम लोकसभा चुनाव को हम भावनात्मक मुद्दों की बलि नहीं चढ़ने देंगे। “देश मेरा, वोट मेरा, मुद्दा मेरा” कार्यक्रम के जरिये सरकार के पाँच साल के कामकाज की समीक्षा और सत्ता में बैठी पार्टी से जवाब, हिसाब और लेखाजोखा लिया जाएगा।

जयपुर में प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद ने राष्ट्रवाद के नाम पर चुनाव अभियान में लोगों का ध्यान भटकाए जाने के खिलाफ़ सतर्क रहने का संदेश दिया।

23 मार्च की तारीख़ का कई मायनों में ऐतिहासिक महत्व है। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत के अलावा आज राममनोहर लोहिया की जयंती और आपातकाल ख़त्म किये जाने की तारीख़ भी है। इस ऐतिहासिक महत्व के अवसर पर “देश मेरा, वोट मेरा, मुद्दा मेरा” का देश के कोने कोने में आयोजन हुआ।

ग्वालियर में एक लेक्चर देते हुए मेधा पाटकर ने 23 मार्च को ही जन्मे राम मनोहर लोहिया की समाजवादी विरासत को याद किया।

बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, असम, दिल्ली, हरयाणा, कर्णाटक, झारखंड समेत देश के कई राज्यों में सैकड़ों जगहों पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस राष्ट्रव्यापी अभियान में, भोपाल, करूर, इंदौर, दीफु, गुवाहाटी दिल्ली, बैंगलोर, सीवान, पटना, भागलपुर, रेवाड़ी, गुड़गाँव, ग्वालियर, पंचकुला, भुवनेश्वर, इलाहाबाद, अलीगढ़, लखनऊ, वाराणसी, धर्मशाला, चेन्नई, ग्वालियर, जयपुर, जबलपुर, राँची, मुम्बई, अहमदाबाद गढ़चिरौली, अमरावती, यवतमाल, बीकानेर, पुणे, जोधपुर, इत्यादि जगहों पर मुख्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

इस अभियान का हिस्सा कुछ प्रमुख संगठनों की सूची निम्नवत्त है:

राष्ट्रीय जन आंदोलन समन्वय अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति
पेंशन परिषद
वादा न तोड़ो अभियान
राइट टू फूड कंपैन
नेशनल कैंपेन कमिटी फ़ॉर रूरल वर्कर्स
नेशनल कैंपेन फ़ॉर दलित ह्यूमन राइट्स
नेशनल कैंपेन फ़ॉर पीपल्स राइट टू इनफार्मेशन
यूनाइटेड अगेंस्ट हेट
युवा-हल्लाबोल
यंग इंडिया अधिकार मंच
राइट टू एजुकेशन फॉरम
एकता परिषद
स्वराज अभियान
नो वोटर लेफ्ट बिहाइंड फॉरम
कारवाँ-ए-मोहब्बत
जगनाच्या हक्कचे आंदोलन, महाराष्ट्र
देशाकगी नावु
कर्णाटक विद्यार्थी संगठने
जनांदोलनागा महामैथरी
सूचना रोज़गार अधिकार अभियान, राजस्थान
विद्यावन्त वेदिके, तेलंगाना
महाराष्ट्र युवा परिषद
सुराज्य सेना, महाराष्ट्र
सेव द कॉन्स्टिट्यूशन फॉरम, कर्णाटक
दिल्ली रोजी रोटी अधिकार अभियान
सतर्क नागरिक संगठन

शहीद दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यकर्मों की श्रृंखला महाराष्ट्र के नन्दूरबार ज़िले में एक विशाल आदिवासी सम्मेलन के साथ सम्पन्न हुई।

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