Press Release
रामलीला मैदान पहुंचे देश भर से आए किसान. स्वराज इंडिया ने बिजवासन से रामलीला मैदान तक किया पैदल किसान मुक्ति मार्च.

रामलीला मैदान पहुंचे देश भर से आए किसान. स्वराज इंडिया ने बिजवासन से रामलीला मैदान तक किया पैदल किसान मुक्ति मार्च.

स्वराज इंडिया/ जय किसान आंदोलन

प्रेस नोट : 29 नवंबर 2018

रामलीला मैदान पहुंचे देश भर से आए किसान

स्वराज इंडिया ने बिजवासन से रामलीला मैदान तक किया पैदल मार्च

–  कल होगा किसानों का ऐतिहासिक संसद मार्च

ऋणमुक्ति और फ़सल के ड्योढ़े दाम के लिए हो रहा है किसान मुक्ति मार्च

किसान मुक्ति मार्च के पहले दिन स्वराज इंडिया अध्यक्ष योगेंद्र यादव व जय किसान आन्दोलन के संयोजक अभिक साहा के नेतृत्व में देशभर से आए किसानों ने बिजवासन से रामलीला मैदान तक पैदल मार्च की। 26 किलोमीटर की यह यात्रा दिल्ली देहात में बिजवासन से शुरू होकर रामलीला मैदान पर समाप्त हुआ। इस किसान मार्च में विभिन्न राज्यों बिहार, झारखंड, उड़ीसा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक आदि राज्यों के किसान शामिल हुए।

इस मौके पर मोदी सरकार को अब तक की सबसे किसान-विरोधी सरकार बताते हुए स्वराज इंडिया अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने कहा कि “किसान मुक्ति मार्च” देश के किसानों की लूट, आत्महत्या, शोषण और अन्याय से मुक्ति की यात्रा है। आज की इस यात्रा में किसान अकेले नहीं है, बल्कि पूरा देश उनके साथ चल रहा है।

योगेंद्र यादव ने हर भारतीय से 30 नवम्बर की संसद मार्च में ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में हिस्सा लेने की अपील करते हुए कहा कि हमारे देश को सही और सार्थक दिशा किसानों की ख़ुशहाली के बिना नहीं मिल सकती। इसी उद्देश्य से आज 200 से ज़्यादा किसान संगठन “अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति” नाम की एक छतरी के नीचे एकजुट हो गए हैं।

इससे पहले स्वराज इंडिया की दिल्ली देहात मोर्चा ने देश भर से आये किसानों का स्वागत किया और बिजवासन में कैम्प बनाकर उनके ठहरने का इंतज़ाम किया।

दो दिन की हो रही “किसान मुक्ति मार्च” की मांग है कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर किसान संसद द्वारा पारित किए गए दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों को पास किया जाए। पहला कानून किसानों की ऋण मुक्ति का है, जबकि दूसरा कृषि उपज का उचित और लाभकारी मूल्य से जुड़ा है।

मार्च का समर्थन करने के लिए अलग-अलग समूह सामने आए हैं। मसलन स्टूडेंट फ़ॉर फार्मर्स, जर्नलिस्ट फ़ॉर फार्मर्स, आर्टिस्ट फ़ॉर फार्मर्स, लॉयर्स फॉर फार्मर्स और डॉक्टर्स फ़ॉर फार्मर्स जैसे समूहों ने किसानों के साथ यात्रा की। रामलीला मैदान पहुंचने के बाद 29 नवम्बर की शाम को एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

जय किसान आंदोलन के संयोजक अभीक साहा ने बताया कि देशभर का आक्रोशित किसान बार बार दिल्ली आने को मजबूर हो रहा है क्यूंकि उनके साथ बार बार छलावा हो रहा है। एक तरफ देश का पैसा लेकर बड़े बड़े पूंजीपतियों को विदेश भगा दिया जाता है, तो दूसरी तरफ़ किसानों के कर्ज़मुक्ति के वाजिब मांग को लगातार अनसुना किया जा रहा है। हमारी मांग है कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर किसानों की बदहाली पर चर्चा हो और किसान संसद में पारित हुए दोनों बिलों को देश की संसद में पास किया जाए।

स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुपम ने किसान मुक्ति मार्च को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस ज़ोरदार प्रदर्शन का कारण है कि देश का बदहाल किसान अपनी पीड़ा और आवाज़ को सत्ता के शीर्ष में बैठे लोगों तक पहुंचाना चाह रहा है। यही कारण है कि 200 से ज़्यादा किसान संगठन आज विचारधारा की सीमाओं से ऊपर उठकर एक सामूहिक संघर्ष कर रहे हैं। सरकार में बैठे लोग हिन्दू मुसलमान के नाम पर देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं, हम किसान नौजवान के नाम पर देश को बनाने के लिए संघर्षरत हैं।

Swaraj India / Jai Kisan Andolan

Press Note: 29 Nov 2018

 

Agitating farmers from across the country reach Ramlila Maidan under the banner of AIKSCC 

Swaraj India leads #KisanMuktiMarch from outer Delhi’s Bijwasan to Ramlila Maidan

Historic Parliament March demanding MSP & one time loan waiver on Friday 30th from Ramlila Maidan 

 

On the first day of the Kisan Mukti Morcha, Swaraj India president Yogendra Yadav led farmers through a footmarch of 26 kilometres. The march started at Outer Delhi’s Bijwasan culminating at the Ramlila maidan. Agitating farmers from different states : Odisha, Bihar, Madhya Pradesh, Karnataka, Andhra Pradesh, West Bengal, etc have gathered under the banner of All India Kisan Sangharsh Cooridnation Committee.

Terming the present Modi regime as the most anti-farmer govt ever, Yogendra Yadav stated that “Kisan Mukti March” is for the ‘Mukti’ or liberation of farmers from the spectre of suicides, from various forms of exploitation propagated by the state and from organised loot & plunder. Farmers are not alone in their struggle, the nation stands with them: students, artists, lawyers, doctors, all sections of society extended it’s support and solidarity to the marching farmers.

Before this, welcoming the farmers from all over the country, the Delhi Dehaat Morcha of Swaraj India had facilitated their stay in Delhi. The All India Kisan Sangharsh Coordination Committee has demanded that the Parliament call a special session and pass the two bills: the first bill relates to one-time full loan waiver as a relief to debt-ridden farmers. The second bill is a long term institutional measure to ensure farmers are not pushed to indebtedness again. The demand is to guarantee remunerative price to farmers as per recommendations of the Swaminathan Commission, that says to fix MSP at 50% above the comprehensive cost of production, C2.

The march has been supported by different contingents like the students for farmers, journalists for farmers, artists for farmers, lawyers for farmers and doctors for farmers. The civil society has come out in solidarity with the agitating farmers.

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