स्वराज इंडिया हरियाणा के वरिष्ठ नेता रवि भटनागर का लेख: किसान की दुर्दशा, ज़िम्मेदार कौन ?

किसान की दुर्दशा, ज़िम्मेदार कौन ? सोना तो उगलती रही इस देश की धरती, पर जाता कहाँ रहा? सब जानते हैं, किस किस ने निगला इस सोने को। कवि और लेखकों की अद्भुत कल्पनायें, किसान को अन्नदाता के रूप में संबोधित कर उनका मान बढ़ाती रहीं। हमारे सिनेमा और सभी बडे़ राजनीतिक दलों के नेता…

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स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजीव ध्यानी का लेख: विज्ञापनों की दुनिया, एयरटेल वाली लड़की और मोदी जी

विज्ञापनों की दुनिया, एयरटेल वाली लड़की और मोदी जी किसी भी नए प्रोडक्ट के विज्ञापन में उसका सबसे मजबूत पक्ष ही सामने लाया जाता है। ये विज्ञापन सकारात्मक और आक्रामक होते हैं। लेकिन पुराने स्थापित प्रोडक्ट के मामले में कभी- कभी विज्ञापन रक्षात्मक भी हो जाते हैं। उदाहरण के लिए एक ऐसे साबुन को लीजिए,…

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स्वराज अभियान महाराष्ट्र के महासचिव, संजीव साने का लेख: संवेदना

संवेदना तब एक तौलिये से पूरा घर नहाता था दूध का नम्बर बारी-बारी आता था छोटा माँ के पास सो कर इठलाता था पिताजी से मार का डर सबको सताता था बुआ के आने से माहौल शान्त हो जाता था पूड़ी-खीर से पूरा घर त्यौहार मनाता था बड़े भाई के कपड़े छोटे होने का इन्तजार…

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Swaraj India Presidium Member and National Spokesperson Anupam’s article: By-polls Results, Anti-Incumbency and Two Steps Back

By-polls Results, Anti-Incumbency and Two Steps Back The results of 4 Lok Sabha and 11 Vidhan Sabha by-polls announced on 31st May prove that a very strong anti-incumbency against Modi government has begun to creep in. Bharatiya Janata Party performing so poorly, that too when the alternatives were not very credible ones, show that the…

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स्वराज अभियान महाराष्ट्र के महासचिव, संजीव साने का लेख: गैर भाजपा वाद कितना सही, कितना जरूरी?

गैर भाजपा वाद कितना सही, कितना जरूरी? 2019 के चुनावी गठजोड़ की शुरुआत कर्नाटक से हो गई है. भाजपा विरोधी शक्तियाँ अपने अंकगणित के हिसाब से देश की मौजूदा जनविरोधी और संविधान विरोधी सरकार को उखाड़ फेंकने की मंशा रखती हैं, जो कि स्वाभाविक भी है. इसी अंकगणित को सामने रखकर डॉ. राम मनोहर लोहिया…

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Senior Leader of Swaraj India Andhra Pradesh B. Ramakrishna Raju’s article: Lessons to be Learnt from Recent Elections

Lessons to be Learnt from Recent Elections Karnataka has given a fractured mandate. And the aftermath of politics played by the political parties exposed their naked opportunism and greed. BJP with 104 MLAs, short of 9 MLAs for full majority claimed stake to form the government with a firm resolve of poaching MLAs from other…

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म्यांमार के रोहिंग्या संकट पर स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजीव ध्यानी के लम्बे लेख की तीसरी किश्त

बेघर और बेचारे लोग 3 म्यांमार के रोहिंग्या संकट पर राजीव ध्यानी के लम्बे लेख की तीसरी किश्त जब समूचा बर्मा या यूँ कहें कि बर्मीज़ बौद्ध जापान की मदद से अंग्रेजों से लड़ने के लिए सेनाएं बना रहे थे, तब रोहिंग्या अंग्रेजों के साथ थे. आपसी समझ यह थी, कि अगर बर्मा पर अंग्रेजी…

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Swaraj India National Steering Committee Member K. Balakrishnan’s article in Tamil: Towards Alternative in Agricultural Domain

விவசாய அரங்கத்தில் மாற்றத்தை நோக்கி விவசாயிகளின் பிரச்சினைகளையும், அதற்கான தீர்வுகளையும் அகில இந்திய மட்டத்தில் எழுப்பவும், சிறு சிறு விவசாய சங்கங்களுக்கிடையே ஒருங்கிணைப்பை ஏற்படுத்தவும், அவைகளின் கோரிக்கைகளை, குரல்களை இந்திய அளவில் வெளிப்படுத்தவும், பேராசிரியர் யோகேந்திர யாதவ் அவர்களால் ஏற்படுத்தப்பட்ட இயக்கமே வாழ்க விவசாயி இயக்கமாகும். இது வழக்கமான பாணியில் தனிநபர்களை முன்னிலைப்படுத்தாமலும், தங்கள் பின்னால் பிற அமைப்புகள் வரவேண்டும் என்ற முனைப்புள்ள அமைப்பாக இல்லாமலும், ஒரு மாறுபட்ட அமைப்பாகவும், விவசாயிகளின் வாழ்க்கையில் மாற்றத்திற்கான அமைப்பாகவும் விளங்கும்.…

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स्वराज इंडिया हरियाणा के वरिष्ठ नेता रवि भटनागर का लेख: जनतंत्र की कथा, व्यथा और विकल्प

जनतंत्र की कथा, व्यथा और विकल्प आज देश की आम जनता और सामाजिक अवस्था, दोनों ही व्यथित हैं। जनता की चाहतें ही नहीं, अब तो मूलभूत ज़रूरतें भी आसमान छू रही हैं. सरकार की हर कोशिश मुसीबतों को और बढाती हुई लगती है. चार साल पहले जनता ने कुछ बेहतर हो जाने की उम्मीदें पाली…

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স্বরাজ ইন্ডিয়া পশ্চিমবঙ্গের রাজ্য অধ্যক্ষ সঞ্জীব মুখার্জীর প্রতিবেদন: পশ্চিমবঙ্গের দীর্ঘস্থায়ী ও গভীর সমস্যাগুলি ও তার মোকাবিলার উপায়

পশ্চিমবঙ্গের দীর্ঘস্থায়ী ও গভীর সমস্যাগুলি ও তার মোকাবিলার উপায় আজ পশ্চিমবঙ্গ, অর্থনীতি থেকে শুরু করে সংস্কৃতি, সব ক্ষেত্রেই তার প্রাধান্য হারিয়েছে। আমরা আত্মসমালোচনা করতেও ভুলে গিয়েছি – কেন আমাদের এরকম অবস্থা হল বা কোন উপায়ে আমরা এই অবস্থা থেকে বেরিয়ে আসতে পারি। দিনের পর দিন চলে আসা হিংসা এবং প্রতিহিংসার রাজনীতির দরুন বহু সুযোগ আমরা…

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